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Showing posts from July, 2018

*मत्तगयन्द सवैया* 1,,सावन के महिना अति पावन रोज मना मन औघड़दानी । मान जही सिधवा शिव हा धरले फूल पान चरू भर पानी । देवत हे बरदान सदाशिव हाँसत हावय मातु भवानी । पाप कटे सब दुःख सिरावय बोलत हे सब पंडित ज्ञानी । 2,,,अर्जुन के रथ हाँकन लागय भूल गये किशना ठकुराई । पांडव पाँच खड़े रण मा अउ सौ झन हावय कौरव भाई । रोज मरे बुझगे कुल कौरव लोभ तरी सब होय लड़ाई । जीत गए सत के बल पांडव या सब मोहन के चतुराई । 3,,,तीज तिहार उमंग भरे मइके अँगना मन भावन लागे । देखत हे बहिनी मन बाट निहारत जोरन बाँधन लागे । रीत मया बँधके भइया बहिनी घर लेवन आवन लागे । जावत हे मइके बहिनी मन रीत ख़ुशी मुसकावन लागे । 4,,हाँसत खेलत बीत जही सुनले मनवा सबके जिनगानी । राखव प्रेम दया अउ अंतस राखव थोकिन आँखिन पानी । काबर तैं अटिवावत हावस रे बिरथा बल मा अभिमानी । ये जिनगी बरदान हरे मन राख मया मुख सुघ्घर बानी । आशा देशमुख

*दुर्मिळ सवैया* 1,,करिया करिया दिखथे बदरा,अउ जाय कहाँ कति ले बरसे । सब खेत इहाँ परिया परगे ,अउ नीर बिना दुनियाँ तरसे । सुनले बिनती भगवान कभू ,किरपा करदे जग हा हरसे । जब तोर दया बरदान मिले प्रभु ,ये दुनियाँ मन हा सरसे । [ 2,,तन रोग घुना मन मोह घुना ,लगथे तब स्वाद सुहाय नही । कतको सिंचले दिन रात तभो ,जरहा लकड़ी हरियाय नही। कसके इरखा मन गाँठ बँधे ,सच ला छल हा पतियाय नही। अतका सुनले मनखे मन सागर लालच प्यास बुझाय नही । आशा देशमुख

*मदिरा सवैया* 1--हे गणराज करौं बिनती ,सुन कष्ट हरो प्रभु दीनन के । रोग कलेश घिरे जग में,भय दूर करो सबके मन के । हाँथ पसारय द्वार खड़े भरदे घर ला प्रभु निर्धन के । तोर मिले बरदान तहाँ दुखिया चलथे सुखिया बनके। 2--राम रहीम धरे मुड़ रोवत नाम इँहा बदनाम करे । उज्जर उज्जर गोठ करे अउ काजर के कस काम करे । रावण के करनी करके मुख मा कपटी जय राम करे । त्याग दया तप नीति बतावय भोग उही दिन शाम करे । 3--काम करो अइसे जग मा सब निर्मल देश समाज रहे। मानय नीति निवाव सबो झन सुघ्घर गाँव सुराज रहे । दीन दुखीकउनो झन राहय हाँथ सबो श्रम काज रहे । हाँसत खेलत बीतय गा सबके जिनगी सुर साज रहे। 4--सूरज चाँद उवे जग में गुरु के बिन ये अँधियार हवे । जे जिनगी उजियार करे गुरु हे जगतारन हार हवे । वेद पुराण मिले जग ला सब ये गुरु के उपकार हवे । अंतस जोत जलावत हे महिमा गुरु ज्ञान अपार हवे । 5--मान मरे पुरखा मन के अउ जीयत बाप इँहा तरसे । रीत कहाँ अब कोन बतावय नीर बिना मछरी हरसे । देखत हे जग के करनी सब रोवत बादर हा बरसे । फोकट के मनखे अभिमान दिनों दिन पेड़ सही सरसे । आशा देशमुख

*किरीट सवैया* 1--रोय किसान धरे मुड़ ला अब नीर बिना सब खेत सुखावय । का विधना अपराध करे हन ये दुख काबर हे नहि जावय । थोकिन मोर घलो सुनले बिनती महराज कहाँ सुख हावय । जोड़य हाँथ नवावय माथ बता कइसे जग दुःख सुनावय । 2---केशव माधव हे मधुसूदन गोपकुमार सुनो नटनागर । ये जग ला विपदा अति पेरय दूर करो दुख हे सुख सागर । प्रीत मया बिन ये जग मा अति पाप बढ़े छलके छल गागर । हे मुरली धर रास रचावव प्रेम दया बरसावव आगर । आशा देशमुख

*चकोर सवैया* होवय आज बिहाव सखी कइना तुलसी वर सालिकराम । सुघ्घर रंग सजाव सँवारव होय सबो सुभ पूरनकाम । माथ नवावत हे जग हा तुलसी चँउरा बिरवा सुख धाम । पाप सबो उतरे तनके मनके जपले तुलसी हरि नाम । आशा देशमुख

*अरसात सवैया* 1--ये मन मा अँधियार हवे भरदे सब ज्ञान हरो तम शारदे । भागत हे बिन डोर बँधे कस दे भटके मन मा रम शारदे । ज्ञान बसे जब ये हिरदे सब देखत भागत हे भ्रम शारदे । देवव दान दया किरपा उजियार करो जग पूनम शारदे । 2--जेन किलो भर लाय कभू अब पाव धरे घर लावय गोंदली । साग पताल घलो मँहगा अति कोन कहाँ अब खावय गोंदली । वो दिन हा सपना कस लागय फोरन मा ममहावय गोंदली । हाट बजार लगे अइसे सबके सिर ताव नवावय गोंदली । आशा देशमुख

*मोद सवैया* कलयुगी बेटा 1--बाप सबो सुख वारत हे पर बात इँहा बेटा नइ मानै । ताश जुआ अउ मंद शराब म वो दुख ला पीये घर लानै । हारत हे समझा समझा नइ मोह मया एको पहिचानै । आखिर मा सब खेत चुगे चलगे अब हंसा का पछितानै । 2--रोज सिया पति राम रटो मन रोग सबो संसो मिट जाही । अंतस के पट खोलव जी तब राम सिया झाँकी दिख पाही । प्रेम मया बगरावव जी भव सागर रामा पार लगाही । हाँथ बने धर ले प्रभु के नइतो ठगनी माया भरमाही । 3--दूध दुहे बर राउत आवय हाँथ ठकेली हे गर नोई । लागय गाय गरू मन के अब बात सुनैया आ गय कोई । खेलत कूदत हे बछिया मन बोलय ग्वाला रे चुप गोई । गाय गरू अउ दूध बिना जुचछा घर कोठा और रसोई । 4-/आज घलो गरजे घुमड़े बरसे कस लागै बादर पानी । रोय किसान धरे मुड़ ला करथे बदरा कैसे मनमानी । खेत भरे करपा हर माढ़य कोन बचाही मोर किसानी । हे विधना हमरो सुनले सबके च लथे एमा जिनगानी । 5---दूध दुहे बर आवय राउत हाँथ कसेली हे गर नोई । लागय गाय गरू मन के अब बात सुनैया आ गय कोई । खेलत कूदत हे बछिया मन बोलय ग्वाला रे चुप गोई । गाय गरू अउ दूध बिना जुचछा घर कोठा और रसोई । 6--हाँथ धरे डमरू शिव शंकर नाचत हे भोले त्रिपुरारी । भूत परेत घलो सँग नाचय हाँसत हे दे दे सब तारी । माथ सजे मुस्कावत हे अति सुघ्घर चंदा हे मनहारी । साँप गला लिपटाय हवे करिया करिया हावै विषधारी । 7--हे शिव शंकर पारवती पति औधड़ दानी हे घट वासी । माँगत हौं बरदान सुनो प्रभु प्रेम दया दे दे अविनासी । मोह मया दुख कारण हे तब ले मन हाँसै छोड़ उदासी । जे हिरदे प्रभु वास करे तब कोन जही गंगा अउ कासी । आशा देशमुख

*सुन्दरी सवैया* 1--तरसे रँधनी घर तेल बिना अउ मंदिर जोत जलावत घी के । मुखिया बनके इतरावत हे सबला उरकावत हावय पी के । पर के वश मा रहही जिनगी तब काय करे मरके अउ जी के । अब कोन बतावय दाँत इँहा अलगे अलगे कथनी करनी के। 2---डिगरी धरके किंजरे लइका मन काम बुता बिन हे भटके जी । मिल जाय कहूँ जब काम बुता तनखा मिलथे बहुते कट के जी । कतका गुण हे कतको झन के बिन शोर सिफारिश के अटके जी ।सरकार कती जब काम मिले तब इंखर तो लटके झटके जी। 3--उपकार मनावव ये जिनगी सुख ईश्वर के बरदान मिले हे । किरपा गुरु के मिल जाय कभू तब मानँव गा भगवान मिले हे । भरके चुप जेन समुन्दर के कस मान तभे सत ज्ञान मिले हे । जइसे मनखे मन काम करे वइसे जग मा पहिचान मिले हे । 4---सुरसा कस बाढ़त दाहिज के मुँह कोन इँहा अब बंद करावै । कतको धन डारत हे मुख मा तब ले भइया कमती पड़ जावै । कतको बिटिया बहिनी मन के जिनगी दुख के सँग बीतत हावै । कइसे अब रीत रिवाज निभै कइसे सुख के परिवार बसावै । 5--बड़का पद पावत ये मनखे मन काबर जी बहुते इतराथे । पर के पिरिया दुख ला समझे नइ फोकट मान मया दिखलाथे। कथनी अलगे करनी अलगे मउँका परथे तब माथ नवाथे । कइसे बिसवास करे अब गा तुरते सब एमन बात बनाथे । 6--बिहने बिहने लइका मन आवय बोलत हावय छेरिक छेरा। हुत पारत हे चिल्लावत हे पइसा अउ धान ल हेरव हेरा। मिलके सब आवत संग धरे अबड़े झन गोल बनावय घेरा। कतको झन तो दुइ चार घनी कतको झन फेर लगावय फेरा। आशा देशमुख

*अरविन्द सवैया* 1--मनखे अतका चतुरा बनगे मन ही मन सोचत हे भगवान । सुख में सुमिरै तक नाम नही दुख मा सब बोलत हे भगवान । तन थोकिन जर्जर होवत हे कहिथे तब घोरत हे भगवान । खुद आलस में मनखे रहिथे अउ बोलय सोवत हे भगवान । क्षमा याचना 2--जिभिया गलती कर डारिस हे पर अंतस पावन हे गुरुदेव । पथरा पटके कस लागत हे अँखिया बर सावन हे गुरुदेव । परछो गुरु लेवत हे कहिके मन मोद उछावन हे गुरुदेव । जड़ हे मति मोर क्षमा कर दौ मुड़ लाज लजावन हे गुरुदेव ।। 3--पूस के रात बिन कंबल के तरसे हलकू जब आइस पूस जनाइस जाड़ । अति ठंड लगे ठिठुरे तन हा अउ हाँथ जुड़ावय काँपय हाड़ । जबरा बइठे रतिया भर संग म पूँछ हिलावय पावय लाड़ । बिहने हलकू जब खेत ल देखय रोवय अब्बड़ गा बम फाड़ । गुरु 4--मनखे मनखे सब एक हवे ,गुरु ज्ञान दिया सत जोत जलाय । सुमिरै गुरुनाम तरे भवसागर अंतस मा लहरा लहराय । दिन रात बरे सत जोत जिहाँ सुख के अँवरा सब ओर समाय । जिनगी सुधरे सब ताप मिटे सत के रसता गुरु ज्ञान बताय । 5--तिवरा बटरा तिंवरा बटरा गहदे अति सुघ्घर देखत ये मन हा हरसाय । अति कोंवर कोंवर पान उलोहय अब्बड़ इंखर साग मिठाय । धरके जब हाट म लाय मरारिन भाव बढ़ाय तभो बिक जाय । अतका मन भावत हे तिंवरा बटरा सबके मन ला ललचाय । आशा देशमुख

*सुखी सवैया* 1--तृष्णा मोह जिनगी हर बीतय जोरत जोरत अंत समे कुछु काम न आवय । सब मोह मया भुलवारत हे अउ छूटत साँस सबो तिरियावय । गिनके मिलथे जिनगी दिन हा तब ले मनखे मन जाय भुलावय । कतको भलमानुष हे जग मा जस के करनी कर नाम कमावय 2--बलि बदना बदके बलि देवत हे कतको मनखे मन देव मनावय । झन मारव जीव जनावर ला सब मा सुनले भगवान समावय । नइ माँगय देव कभू कउनों बलि ये मनखे मन रीत बनावय । कुकरा बकरा बधिया कहिके मनखे जिभिया रस स्वाद बतावय । 3--आज का चित्रण पहली बिहने हरिनाम भजे अउ राम कहे जय राम कहे सब । अब तो उठके सब फोन धरे अउ कॉल करे मिस कॉल करे तब । युग हा बदले मनखे बदले तकनीक नवा सब बौरत हे अब । रतिया भर जागय नेट धरे दिन मा सुसतावय काम करे कब । 4--नवा साल के बधाई शुभ होवय साल नवा सबके जिनगी हर सुघ्घर सुन्दर बीतय । परिवार सबो खुशहाल रहे सुख के तरिया ह कभू झन रीतय । सुख मान मया सुमता नित बाढ़य दुःख सुवारथ ला सब जीतय । दुनियाँ भर नाम करे जस के मनखे मन प्रेम मया रँग छीतय । 5--सब खोजय मंदिर तीरथ मा अउ खोजत हे तुंहला बन मा प्रभु । कउनों नइ झांकय अंतस ला बइठे हिरदे रहिथौ मन मा प्रभु । नइ रीझव राज सिंहासन मा नहि दौलत मा नइतो धन मा प्रभु । बस भाव भरे मन उज्जर देखव रीझव बोइर माखन मा प्रभु । आशा देशमुख