*मोद सवैया*
कलयुगी बेटा
1--बाप सबो सुख वारत हे पर बात इँहा बेटा नइ मानै ।
ताश जुआ अउ मंद शराब म वो दुख ला पीये घर लानै ।
हारत हे समझा समझा नइ मोह मया एको पहिचानै ।
आखिर मा सब खेत चुगे चलगे अब हंसा का पछितानै ।
2--रोज सिया पति राम रटो मन रोग सबो संसो मिट जाही ।
अंतस के पट खोलव जी तब राम सिया झाँकी दिख पाही ।
प्रेम मया बगरावव जी भव सागर रामा पार लगाही ।
हाँथ बने धर ले प्रभु के नइतो ठगनी माया भरमाही ।
3--दूध दुहे बर राउत आवय हाँथ ठकेली हे गर नोई ।
लागय गाय गरू मन के अब बात सुनैया आ गय कोई ।
खेलत कूदत हे बछिया मन बोलय ग्वाला रे चुप गोई ।
गाय गरू अउ दूध बिना जुचछा घर कोठा और रसोई ।
4-/आज घलो गरजे घुमड़े बरसे कस लागै बादर पानी ।
रोय किसान धरे मुड़ ला करथे बदरा कैसे मनमानी ।
खेत भरे करपा हर माढ़य कोन बचाही मोर किसानी ।
हे विधना हमरो सुनले सबके च लथे एमा जिनगानी ।
5---दूध दुहे बर आवय राउत हाँथ कसेली हे गर नोई ।
लागय गाय गरू मन के अब बात सुनैया आ गय कोई ।
खेलत कूदत हे बछिया मन बोलय ग्वाला रे चुप गोई ।
गाय गरू अउ दूध बिना जुचछा घर कोठा और रसोई ।
6--हाँथ धरे डमरू शिव शंकर नाचत हे भोले त्रिपुरारी ।
भूत परेत घलो सँग नाचय हाँसत हे दे दे सब तारी ।
माथ सजे मुस्कावत हे अति सुघ्घर चंदा हे मनहारी ।
साँप गला लिपटाय हवे करिया करिया हावै विषधारी ।
7--हे शिव शंकर पारवती पति औधड़ दानी हे घट वासी ।
माँगत हौं बरदान सुनो प्रभु प्रेम दया दे दे अविनासी ।
मोह मया दुख कारण हे तब ले मन हाँसै छोड़ उदासी ।
जे हिरदे प्रभु वास करे तब कोन जही गंगा अउ कासी ।
आशा देशमुख
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