*दुर्मिळ सवैया* 1,,करिया करिया दिखथे बदरा,अउ जाय कहाँ कति ले बरसे । सब खेत इहाँ परिया परगे ,अउ नीर बिना दुनियाँ तरसे । सुनले बिनती भगवान कभू ,किरपा करदे जग हा हरसे । जब तोर दया बरदान मिले प्रभु ,ये दुनियाँ मन हा सरसे । [ 2,,तन रोग घुना मन मोह घुना ,लगथे तब स्वाद सुहाय नही । कतको सिंचले दिन रात तभो ,जरहा लकड़ी हरियाय नही। कसके इरखा मन गाँठ बँधे ,सच ला छल हा पतियाय नही। अतका सुनले मनखे मन सागर लालच प्यास बुझाय नही । आशा देशमुख

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*सुमुखी सवैया

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

*किरीट सवैया* 1--रोय किसान धरे मुड़ ला अब नीर बिना सब खेत सुखावय । का विधना अपराध करे हन ये दुख काबर हे नहि जावय । थोकिन मोर घलो सुनले बिनती महराज कहाँ सुख हावय । जोड़य हाँथ नवावय माथ बता कइसे जग दुःख सुनावय । 2---केशव माधव हे मधुसूदन गोपकुमार सुनो नटनागर । ये जग ला विपदा अति पेरय दूर करो दुख हे सुख सागर । प्रीत मया बिन ये जग मा अति पाप बढ़े छलके छल गागर । हे मुरली धर रास रचावव प्रेम दया बरसावव आगर । आशा देशमुख