*सुखी सवैया*
1--तृष्णा मोह
जिनगी हर बीतय जोरत जोरत अंत समे कुछु काम न आवय ।
सब मोह मया भुलवारत हे अउ छूटत साँस सबो तिरियावय ।
गिनके मिलथे जिनगी दिन हा तब ले मनखे मन जाय भुलावय ।
कतको भलमानुष हे जग मा जस के करनी कर नाम कमावय
2--बलि
बदना बदके बलि देवत हे कतको मनखे मन देव मनावय ।
झन मारव जीव जनावर ला सब मा सुनले भगवान समावय ।
नइ माँगय देव कभू कउनों बलि ये मनखे मन रीत बनावय ।
कुकरा बकरा बधिया कहिके मनखे जिभिया रस स्वाद बतावय ।
3--आज का चित्रण
पहली बिहने हरिनाम भजे अउ राम कहे जय राम कहे सब ।
अब तो उठके सब फोन धरे अउ कॉल करे मिस कॉल करे तब ।
युग हा बदले मनखे बदले तकनीक नवा सब बौरत हे अब ।
रतिया भर जागय नेट धरे दिन मा सुसतावय काम करे कब ।
4--नवा साल के बधाई
शुभ होवय साल नवा सबके जिनगी हर सुघ्घर सुन्दर बीतय ।
परिवार सबो खुशहाल रहे सुख के तरिया ह कभू झन रीतय ।
सुख मान मया सुमता नित बाढ़य दुःख सुवारथ ला सब जीतय ।
दुनियाँ भर नाम करे जस के मनखे मन प्रेम मया रँग छीतय ।
5--सब खोजय मंदिर तीरथ मा अउ खोजत हे तुंहला बन मा प्रभु ।
कउनों नइ झांकय अंतस ला बइठे हिरदे रहिथौ मन मा प्रभु ।
नइ रीझव राज सिंहासन मा नहि दौलत मा नइतो धन मा प्रभु ।
बस भाव भरे मन उज्जर देखव रीझव बोइर माखन मा प्रभु ।
आशा देशमुख
Comments
Post a Comment