*अरविन्द सवैया*
1--मनखे अतका चतुरा बनगे मन ही मन सोचत हे भगवान ।
सुख में सुमिरै तक नाम नही दुख मा सब बोलत हे भगवान ।
तन थोकिन जर्जर होवत हे कहिथे तब घोरत हे भगवान ।
खुद आलस में मनखे रहिथे अउ बोलय सोवत हे भगवान ।
क्षमा याचना
2--जिभिया गलती कर डारिस हे पर अंतस पावन हे गुरुदेव ।
पथरा पटके कस लागत हे अँखिया बर सावन हे गुरुदेव ।
परछो गुरु लेवत हे कहिके मन मोद उछावन हे गुरुदेव ।
जड़ हे मति मोर क्षमा कर दौ मुड़ लाज लजावन हे गुरुदेव ।।
3--पूस के रात
बिन कंबल के तरसे हलकू जब आइस पूस जनाइस जाड़ ।
अति ठंड लगे ठिठुरे तन हा अउ हाँथ जुड़ावय काँपय हाड़ ।
जबरा बइठे रतिया भर संग म पूँछ हिलावय पावय लाड़ ।
बिहने हलकू जब खेत ल देखय रोवय अब्बड़ गा बम फाड़ ।
गुरु
4--मनखे मनखे सब एक हवे ,गुरु ज्ञान दिया सत जोत जलाय ।
सुमिरै गुरुनाम तरे भवसागर अंतस मा लहरा लहराय ।
दिन रात बरे सत जोत जिहाँ सुख के अँवरा सब ओर समाय ।
जिनगी सुधरे सब ताप मिटे सत के रसता गुरु ज्ञान बताय ।
5--तिवरा बटरा
तिंवरा बटरा गहदे अति सुघ्घर देखत ये मन हा हरसाय ।
अति कोंवर कोंवर पान उलोहय अब्बड़ इंखर साग मिठाय ।
धरके जब हाट म लाय मरारिन भाव बढ़ाय तभो बिक जाय ।
अतका मन भावत हे तिंवरा बटरा सबके मन ला ललचाय ।
आशा देशमुख
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