*सुमुखी सवैया

सुमुखी सवैया

नवरात

घरो घर मंदिर जोत जले ,जग हा नवरात मनावत हे।
चले धर सेउक हूमन धूपन ,माँदर ढोल बजावत हे।
दिखै बगिया बड़ सुघ्घर माँ ,दिन रात बढ़े लहरावत हे।
परे पइँया जग हा मइया तुहरे जस ला सब गावत हे।


कृष्णलला

उठै बिहने मन मोहन हा बन जावय धेनु चरावत हे।
सखा मन के सँग मा मिलके प्रभु माखन खात खवावत हे।
लगै बड़ सुघ्घर कृष्ण लला सब गोप गुवाल नचावत हे।
रिझावत हे जग ला  किशना यमुना तट रास रचावत हे।

*नशा*
नशा हर नास करे जिनगी ,करथे नुकसान घलो धन के।
बचाय नही धन दौलत ला ,अउ होय नशा बइरी तन के।
बिकै घर खेत सबो सुख जाय रहे मनखे कँगला बनके।
रहे परिवार तको दुख मा अउ मान घटे दरुवा मन के।

*दाहिज*

हवे मुँह दाहिज के सुरसा कतको जिनगी ला लील डरे ।
समाज कहे झन दाहिज दौ तब ले कउनो नइ चेत धरे।
कहे बिटिया बहिनी मन हा कउनो अब तो बलि बंद करे।
विरोध करें बस भाषण मा उँखरे घर नीति नियाव मरे।

आशा देशमुख

Comments

  1. बहुत सुंदर सवैया छंद दीदी

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    1. बहुत बहुत आभार भाई हेम

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  2. बहुत बढ़िया सवैया दीदी जी
    बधाई हो

    महेन्द्र देवांगन माटी

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  3. अति सुन्दर

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