*गुरु घासीदास जयंती विशेषांक* *बरवै छंद* गुरू महिमा अमरौतिन के कोरा ,खेले लाल। महँगू के जिनगी ला ,करे निहाल।1। सत हा जइसे चोला ,धरके आय। ये जग मा गुरु घासी ,नाम कहाय।2। सत्य नाम धारी गुरु ,घासीदास। आज जनम दिन आये ,हे उल्लास।3। मनखे मनखे हावय ,एक समान। ये सन्देश दिए हे, गुरु गुनखान।4। देव लोक कस पावन ,पुरी गिरौद। सत्य समाधि लगावय ,धरती गोद।5। जैतखाम के महिमा ,काय बताँव। येला जानव भैया ,सत के ठाँव।6। निर्मल रखव आचरण ,नम व्यवहार। जीवन हो सादा अउ ,उच्च विचार।7। बिन दीया बिन बाती ,जोत जलाय। गुरु अंतस अँंधियारी ,दूर भगाय।8। अंतस करथे उज्जर ,गुरु के नाम। पावन पबरित सुघ्घर ,गुरु के धाम।9। आशा देशमुख 18-12-18

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*सुमुखी सवैया

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

बरवै छंद आये हे नवराती ,दीया बार। पारँव तोर दुवारी ,मँय गोहार। 1। दुख पीरा ला हरदे ,दाई मोर। बइठे हँव मँय दाई ,शरण म तोर।2। दे दे दाई मोला ,अँचरा छाँव। तोर नेवता पाके ,दँउड़त आँव।3। तिहीं रचाये दाई ,ये संसार। तोर मया बोहावय ,अमरित धार।4। तँय दाई हम लइका ,आवँन तोर। तोर दया के सागर ,करय हिलोर।5। तोर कृपा से जागय ,सबके भाग। कोंदा ला भी मिलथे ,वाणी राग।6। कइसे तोरे महिमा ,करँव बखान। सर्व शक्ति तँय दाई ,दे वरदान। 7। आशा देशमुख