छंदकिसान दिवस विशेष पर गीतिका छंद मा एक
गीत
हाँथ जोड़व मुड़ नवावँव ,भूमि के भगवान हो।
गुन तुँहर कतका गिनावँव ,कर्म पूत किसान हो।
हाँथ मा माटी सनाये ,माथ ले मोती झरे।
सब किसनहा सुन तुँहर ले ,अन्न के कोठी भरे।
धूप जाड़ा शीत तुँहरे ,मीत संगी जान हो।
गुन तुँहर कतका गिनावँव ,भूमि पूत किसान हो।1।
हे जगत के अन्नदाता ,मेटथौ तुम भूख ला।
मेहनत कर रात दिन फेंकव अलाली ऊब ला।
नीर आँखी मा लबालब ,सादगी पहिचान हो।
गुन तुँहर कतका गिनावँव ,कर्म पूत किसान हो।2।
आज तुँहरे दुख सुनैया ,नइ मिलय संसार मा।
सब अपन मा ही लगे हे ,एक होय हज़ार मा।
ये जगत के आसरा हव ,दीन जीव मितान हो।
गुन तुँहर कतका गिनावँव,भूमि पूत किसान हो।3।
आशा देशमुख
कोरबा छतीसगढ़
23-12-2018
Comments
Post a Comment