*वाम जवैया* *किसान* उगावय अन्न उही मन हा दुख भूखमरी दिन काटत हावै। उबारय कोन इहाँ उनला बइठे सब ऊपर रिश्वत खावै । सबो जग जीयत खावत हे इँखरे बल मा सब राज चलावै। कमावत हे दिन रात किसान तभो हक के सुख ला नइ पावै। *गरमी* जरै पँउरी अति घाम जनावय जेठ सहीं गरमी हर आवै। सुहाय नही कउनो अब चीज दही अउ अम्मट हा मन भावै। हवा चलथे अउ लू कस लागय नानुक नानुक पेड़ सुखावै। पियास मरे सब जीव जनावर जाय कहाँ सब ताल अटावै। *कमाई* भले कतको भगवान मना नइ पूरय गा सुन पाप कमाई। कमावय जाँगर पेरय जेन उही धन मान लगे सुखदाई। बिगाड़ करौ झन दूसर के परही खुद ला करनी भरपाई। उही मनखे सुख पावत हे पर के करथे नित जेन भलाई। *सुरता* धरे हँउला पनिहारिन जावय आज नही अब वो दिन आवै। समाय हवै सुरता बस मा सनिमा कस घूमय भाव लुभावै। नवा जुग आय हवे अब तो तइहा मन के सब रीत भुलावै। सँजोय कहाँ कइसे पुरखा मन के सब चीज नँदावत हावै। *सुख-दुख* कभू दुख आय कभू सुख आवय बीच झुलै सबके जिनगानी। बरोबर चाहय मान दुनो अउ लाय दुनो झन आँख म पानी। घरो घर ठौर रहे इँखरे बस अंतर भेद बतावय बानी। निभावय पात्र सबो मनखे मन जेन लिखे भगवान कहानी। आशा देशमुख

Comments

Popular posts from this blog

*सुमुखी सवैया

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

बरवै छंद आये हे नवराती ,दीया बार। पारँव तोर दुवारी ,मँय गोहार। 1। दुख पीरा ला हरदे ,दाई मोर। बइठे हँव मँय दाई ,शरण म तोर।2। दे दे दाई मोला ,अँचरा छाँव। तोर नेवता पाके ,दँउड़त आँव।3। तिहीं रचाये दाई ,ये संसार। तोर मया बोहावय ,अमरित धार।4। तँय दाई हम लइका ,आवँन तोर। तोर दया के सागर ,करय हिलोर।5। तोर कृपा से जागय ,सबके भाग। कोंदा ला भी मिलथे ,वाणी राग।6। कइसे तोरे महिमा ,करँव बखान। सर्व शक्ति तँय दाई ,दे वरदान। 7। आशा देशमुख