*मुक्ताहरा सवैया*
*ठग*
दुकान लगावय गाँव गली ठग चंदन बंदन माथ लगाय।
ठगावत हे मनखे मन हा सब फोकट मा धन धान लुटाय ।
धरे पतरा ठग बाँचत हे मनखे मन के मति ला भरमाय।
इँहा नइहे सुख जीयत ले सुख ठौर सबो परलोक बताय।
*सीख*
कमाय हवे पुरखा मन हा तुँहरे बर तो अतका धन मान।
गरीब लचार जिहाँ दिखथे कर लौ भइया उँहचे कुछु दान।
जबान कभू कड़ुवा झन बोलव गुत्तुर बोल हवे सुख खान।
कहे सत मारग जेन चले उँखरे बर साहित हे भगवान।
*घर भेदी*
इहाँ बइरी बइठे घर मा अपने घर बार लगावय आग।
सिखावन मानत दूसर के पर के बुध मा सुन गावय राग।
सगा बस हे पइसा इँखरे नइ जानय कोन नता अउ लाग।
दुखी परिवार समाज रहे सब एमन कोढ़ लगे कस दाग ।
*जलसंकट*
बढ़े जल संकट हे गहरावय येखर खोजय कोन निदान।
नदी नरवा तरिया सब सूखय जीव जनावर हे हलकान।
कहूँ कर छाँव घलो नइहे छइहाँ सब खोजय होय थकान।
सबो करनी मनखे करथे अब काय करे कइसे भगवान।
*हनुमान जयंती*
लला अवतार धरे अँजनी घर भक्त शिरोमणि हे हनुमान।
दिखे मुखमंडल तेज प्रताप सबो मिल देव करे गुणगान।
बसे मन मा बस राम सिया बल बुद्धि किये नइ जाय बखान।
सबो दुख दारिद दूर करे बस संकट मोचन के कर ध्यान।
*मशीन*
विकास करे दुनियाँ नित देखव आज मशीन घरो घर छाय।
मशीन करे सब काम बुता मनखे मन के बइठे अलसाय ।
हवै वरदान कहे जतका सुनले वतका अभिशाप कहाय।
मिले तन ला सुख अब्बड़ जी तब ले तन मा बड़ रोग हमाय ।
आशा देशमुख
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