*गंगोदक सवैया* जीवन सार प्रेम के गूँथ माला इही काम आये नही तो गियाँ तै रहे नाम के। संग जावै नही सोन चाँदी कभू जिंदगानी धरा हाँथ में राम के। रंक राजा कहाँ जानथे काल हा मोह माया सबो छूटथे चाम के। चाल धोखा ठगी साथ देवे नही आय नेकी दया हा भले काम के। आलसी सोंच आवै बने काम में भी करौं हाँथ डारे तभे वो उबासी लगै। कोन जाने समे हा मिले ना मिले थोरको काम मा ही थकासी लगै। रोज बीते समे चेत आवै नहीं देह जैसे युगों के निवासी लगै। वाह आशा अलाली मरे रोज तैं काम बूता करें मा उदासी लगै। प्रदूषण आज पानी हवा हा कहाँ शुद्ध हे जेन ला देख तेला बिमारी धरे। कारखाना मशीनी धुआँ फ़ैल गे पेड़ पौधा सबो सूख के हे मरे। जीव प्राणी सबो मार झेले इँहा काखरो कोन चिंता कहाँ हे करे। देख लागै सही आज वो गोठ हा जेन जैसे करे तेन वैसे भरे। साग भाजी साग भाजी बिसाये गये हाट तो भाव बोहार के पाव चालीस हे। चेंच भाजी घलो तो नवा आय हे दू जुरी के रुपैया तको तीस हे। फूल गोभी तुमा के पुछारी नही पाव भिंडी करेला घलो बीस हे। ताप ला गोंदली के नवे देख के आज तो जीवरा हाय लागीस हे। राजभोग भ्रष्ट नेता सिपाही अऊ संतरी न्याय माँगे कहाँ कोन जावै कहाँ। नींद भांजे इहाँ राज राजा घलो दुःख ला कोन कैसे सुनावै कहाँ। कान तोपाय हे आँख मूंदाय हे न्याव के गोड़ टूटे चलावै कहाँ। खाय मेवा मलाई करे राज जे फेर वोला चना हा सुहावै कहाँ। आशा देशमुख

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*सुमुखी सवैया

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

बरवै छंद आये हे नवराती ,दीया बार। पारँव तोर दुवारी ,मँय गोहार। 1। दुख पीरा ला हरदे ,दाई मोर। बइठे हँव मँय दाई ,शरण म तोर।2। दे दे दाई मोला ,अँचरा छाँव। तोर नेवता पाके ,दँउड़त आँव।3। तिहीं रचाये दाई ,ये संसार। तोर मया बोहावय ,अमरित धार।4। तँय दाई हम लइका ,आवँन तोर। तोर दया के सागर ,करय हिलोर।5। तोर कृपा से जागय ,सबके भाग। कोंदा ला भी मिलथे ,वाणी राग।6। कइसे तोरे महिमा ,करँव बखान। सर्व शक्ति तँय दाई ,दे वरदान। 7। आशा देशमुख