*सर्वगामी सवैया* समे चोर चौपाल सुन्ना गली मा उदासी पटागे हवे गा कुआँ घाट पानी । रद्दा पुछैया बटोही कहाँ गे मिले हे कहाँ जी मया गोठ बानी । चूल्हा बरे पेट आगी बुझाये करे राज गच्छी दबे आज छानी । लागे लुकाये समे चोर लेगे सबो चीज जुच्छा बताये कहानी। शिवरात्रि मेला भोला दुवारी हवै भीड़ भारी मनौती मनावै खड़े हाँथ जोरे। लोटा भरे दूध पानी चढ़ावै कहे भक्त देवा हरौ दुःख मोरे। आये इँहा संत साधू फकीरा खड़े रंक राजा सबो द्वार तोरे। आशा मनोकामना होय पूरा सबो भक्त आये ख़ुशी ला बटोरे। केंवट प्रसंग 1 जादू भरे पाँव तोरे हवे राम कैसे लगावौं इँहा पार गंगा। डोंगा बने काठ के मोर रामा इही जीविका मोर संसार गंगा। बानी गुहाराज के भेद भारी कहाँ कोन तारे कहाँ तार गंगा। लावै कठौती गुहाराज धोवै सियानाथ पौंरी बहे धार गंगा। 2 भैया गुहा तैं बड़े भागमानी दुवारी म तोरे ग रामा पधारे। बैकुंठवासी ग लक्ष्मी नरायेन आये तपस्या बिना देख डारे। लांनै कठौती कुटुंबी बुलाये ग पौरीं सियाराम के तैं पखारे। गंगा कहे नाम के तारिणी हौं इहाँ आज मोला गुहाराज तारे। आशा देशमुख

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*सुमुखी सवैया

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

बरवै छंद आये हे नवराती ,दीया बार। पारँव तोर दुवारी ,मँय गोहार। 1। दुख पीरा ला हरदे ,दाई मोर। बइठे हँव मँय दाई ,शरण म तोर।2। दे दे दाई मोला ,अँचरा छाँव। तोर नेवता पाके ,दँउड़त आँव।3। तिहीं रचाये दाई ,ये संसार। तोर मया बोहावय ,अमरित धार।4। तँय दाई हम लइका ,आवँन तोर। तोर दया के सागर ,करय हिलोर।5। तोर कृपा से जागय ,सबके भाग। कोंदा ला भी मिलथे ,वाणी राग।6। कइसे तोरे महिमा ,करँव बखान। सर्व शक्ति तँय दाई ,दे वरदान। 7। आशा देशमुख