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गीत

बरवै छंद आये हे नवराती ,दीया बार। पारँव तोर दुवारी ,मँय गोहार। 1। दुख पीरा ला हरदे ,दाई मोर। बइठे हँव मँय दाई ,शरण म तोर।2। दे दे दाई मोला ,अँचरा छाँव। तोर नेवता पाके ,दँउड़त आँव।3। तिहीं रचाये दाई ,ये संसार। तोर मया बोहावय ,अमरित धार।4। तँय दाई हम लइका ,आवँन तोर। तोर दया के सागर ,करय हिलोर।5। तोर कृपा से जागय ,सबके भाग। कोंदा ला भी मिलथे ,वाणी राग।6। कइसे तोरे महिमा ,करँव बखान। सर्व शक्ति तँय दाई ,दे वरदान। 7। आशा देशमुख

कुण्डलिया छंद मतदान के कीमत 1--सेवा करही कोन वो ,धरती दाई तोर। बिकत हवय ईमान हा ,अंतस रोवय मोर। अंतस रोवय मोर ,राज सच हा कब करही। फइले लालच रोग ,कोन दुख पीरा हरही। पइसा खेले खेल , हाथ मा धरके मेवा। पद सब उड़े अगास ,कहाँ धरती के सेवा। 2---अब्बड़ कीमत वोट के ,कोन हवय हकदार। सोचत रहिथंव रात दिन , कोन बनय सरकार। कोन बनय सरकार ,देश के पीरा जानँय। फेंके भ्रष्टाचार ,आम जनता ला मानँय। रखय तंत्र मजबूत ,करय झन कोनो गड़बड़। एक एक मतदान ,कीमती हावय अब्बड़। आशा देशमुख

*गुरु घासीदास जयंती विशेषांक* *बरवै छंद* गुरू महिमा अमरौतिन के कोरा ,खेले लाल। महँगू के जिनगी ला ,करे निहाल।1। सत हा जइसे चोला ,धरके आय। ये जग मा गुरु घासी ,नाम कहाय।2। सत्य नाम धारी गुरु ,घासीदास। आज जनम दिन आये ,हे उल्लास।3। मनखे मनखे हावय ,एक समान। ये सन्देश दिए हे, गुरु गुनखान।4। देव लोक कस पावन ,पुरी गिरौद। सत्य समाधि लगावय ,धरती गोद।5। जैतखाम के महिमा ,काय बताँव। येला जानव भैया ,सत के ठाँव।6। निर्मल रखव आचरण ,नम व्यवहार। जीवन हो सादा अउ ,उच्च विचार।7। बिन दीया बिन बाती ,जोत जलाय। गुरु अंतस अँंधियारी ,दूर भगाय।8। अंतस करथे उज्जर ,गुरु के नाम। पावन पबरित सुघ्घर ,गुरु के धाम।9। आशा देशमुख 18-12-18

छंदकिसान दिवस विशेष पर गीतिका छंद मा एक गीत हाँथ जोड़व मुड़ नवावँव ,भूमि के भगवान हो। गुन तुँहर कतका गिनावँव ,कर्म पूत किसान हो। हाँथ मा माटी सनाये ,माथ ले मोती झरे। सब किसनहा सुन तुँहर ले ,अन्न के कोठी भरे। धूप जाड़ा शीत तुँहरे ,मीत संगी जान हो। गुन तुँहर कतका गिनावँव ,भूमि पूत किसान हो।1। हे जगत के अन्नदाता ,मेटथौ तुम भूख ला। मेहनत कर रात दिन फेंकव अलाली ऊब ला। नीर आँखी मा लबालब ,सादगी पहिचान हो। गुन तुँहर कतका गिनावँव ,कर्म पूत किसान हो।2। आज तुँहरे दुख सुनैया ,नइ मिलय संसार मा। सब अपन मा ही लगे हे ,एक होय हज़ार मा। ये जगत के आसरा हव ,दीन जीव मितान हो। गुन तुँहर कतका गिनावँव,भूमि पूत किसान हो।3। आशा देशमुख कोरबा छतीसगढ़ 23-12-2018

[26/08, 9:37 PM] Asha Deshmukh: आल्हा राखी विशेषांक ये राखी के रीत चलागन ,कोन करे हावय शुरुआत। आवव सुनलव भाई बहिनी ,कथा कहानी के ये बात।1। राजा बलि के परछो लेबर ,वामन रूप धरे भगवान। तीन पाँव भुइँया ला माँगय ,राजा बलि देवत हे दान।2। एक पाँव मा धरती नापय ,एक पाँव ला रखे अकास। एक पाँव मा बलि ला नापय, जा बलि कर पाताल निवास।3। वचन निभावय बलि राजा हा ,तब बोलत हावय भगवान। माँग जेन चाही बलि तोला ,मैं देहँव ओही वरदान।4। मोर राज्य के रक्षा करबे ,बन जा प्रभु मोरे रखवार। राज सिंहासन बइठे बलि अउ ,विष्णु देव हे पहरेदार।5। येती लक्ष्मी बइठे सोचे, चिंता दिखन लगय अब माथ। बड़ दिन होगे हावय अब तो,कहाँ गए हे मोरे नाथ।6। जान डरिस लक्ष्मी हर जइसे ,प्रभु हर रमे लोक पाताल। जग हित बर सब खेल करत हे ,लीलाधारी दीनदयाल।7। लक्ष्मी पहुँचे बलि के द्वारी ,रक्षा सूत्र रखे हे थाल। लक्ष्मी बनगे बलि के बहिनी ,माथ लगावय तिलक गुलाल।8। भाई बनके बलि हा बोलय ,माँग बहिन कोनो उपहार। दे दे भैया मोला तैहर ,तोर खड़े हे पहरेदार।9 तब ले भाई बहिनी खातिर ,रक्षा बंधन बनिस तिहार। बड़ पबरित ये राखी रिश्ता ,मान त हे जम्मों संसार।10 [26/08, 9:39 PM] Asha Deshmukh: हरिगीतिका छंद राखी विशेषांक रक्षा करव रक्षा करव ,निर्बल दुखी असहाय के। रख सूत्र धागा प्रेम के,दुश्मन बनव अन्याय के। भाई बहिन बंधु सखा,पबरित रखव सबसे नता। ये देश तो परिवार हे ,मन मा रखव बस नम्रता। [26/08, 9:39 PM] Asha Deshmukh: आशा देशमुख के बरवै छंद राखी विशेषांक किसम किसम के राखी ,सजे दुकान। ये डोरी के होवय ,बड़ सम्मान।1। बहिनी मन सज धज के,देखय बाट। भैया बर खोले हे ,द्वार कपाट।2। सुघ्घर राखी लानय ,थाल सजाय। खीर मिठाई जेवन ,बने बनाय।3। भाई बहिनी कुलके ,दूनो आज। ये तिहार ला मानय ,सबो समाज।4। भाई बर बहिनी के ,मया दुलार। पबरित डोरी बाँधय,ये संसार।5। सजे कलाई राखी ,माथ गुलाल। ये तिहार ला मानय,जग हर साल।6। हमर देश के पबरित ,आय तिहार। सुघ्घर लागय संस्कृति ,अउ संस्कार।7