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*सुमुखी सवैया

सुमुखी सवैया नवरात घरो घर मंदिर जोत जले ,जग हा नवरात मनावत हे। चले धर सेउक हूमन धूपन ,माँदर ढोल बजावत हे। दिखै बगिया बड़ सुघ्घर माँ ,दिन रात बढ़े लहरावत हे। परे पइँया जग हा मइया ...