[26/08, 9:37 PM] Asha Deshmukh: आल्हा राखी विशेषांक ये राखी के रीत चलागन ,कोन करे हावय शुरुआत। आवव सुनलव भाई बहिनी ,कथा कहानी के ये बात।1। राजा बलि के परछो लेबर ,वामन रूप धरे भगवान। तीन पाँव भुइँया ला माँगय ,राजा बलि देवत हे दान।2। एक पाँव मा धरती नापय ,एक पाँव ला रखे अकास। एक पाँव मा बलि ला नापय, जा बलि कर पाताल निवास।3। वचन निभावय बलि राजा हा ,तब बोलत हावय भगवान। माँग जेन चाही बलि तोला ,मैं देहँव ओही वरदान।4। मोर राज्य के रक्षा करबे ,बन जा प्रभु मोरे रखवार। राज सिंहासन बइठे बलि अउ ,विष्णु देव हे पहरेदार।5। येती लक्ष्मी बइठे सोचे, चिंता दिखन लगय अब माथ। बड़ दिन होगे हावय अब तो,कहाँ गए हे मोरे नाथ।6। जान डरिस लक्ष्मी हर जइसे ,प्रभु हर रमे लोक पाताल। जग हित बर सब खेल करत हे ,लीलाधारी दीनदयाल।7। लक्ष्मी पहुँचे बलि के द्वारी ,रक्षा सूत्र रखे हे थाल। लक्ष्मी बनगे बलि के बहिनी ,माथ लगावय तिलक गुलाल।8। भाई बनके बलि हा बोलय ,माँग बहिन कोनो उपहार। दे दे भैया मोला तैहर ,तोर खड़े हे पहरेदार।9 तब ले भाई बहिनी खातिर ,रक्षा बंधन बनिस तिहार। बड़ पबरित ये राखी रिश्ता ,मान त हे जम्मों संसार।10 [26/08, 9:39 PM] Asha Deshmukh: हरिगीतिका छंद राखी विशेषांक रक्षा करव रक्षा करव ,निर्बल दुखी असहाय के। रख सूत्र धागा प्रेम के,दुश्मन बनव अन्याय के। भाई बहिन बंधु सखा,पबरित रखव सबसे नता। ये देश तो परिवार हे ,मन मा रखव बस नम्रता। [26/08, 9:39 PM] Asha Deshmukh: आशा देशमुख के बरवै छंद राखी विशेषांक किसम किसम के राखी ,सजे दुकान। ये डोरी के होवय ,बड़ सम्मान।1। बहिनी मन सज धज के,देखय बाट। भैया बर खोले हे ,द्वार कपाट।2। सुघ्घर राखी लानय ,थाल सजाय। खीर मिठाई जेवन ,बने बनाय।3। भाई बहिनी कुलके ,दूनो आज। ये तिहार ला मानय ,सबो समाज।4। भाई बर बहिनी के ,मया दुलार। पबरित डोरी बाँधय,ये संसार।5। सजे कलाई राखी ,माथ गुलाल। ये तिहार ला मानय,जग हर साल।6। हमर देश के पबरित ,आय तिहार। सुघ्घर लागय संस्कृति ,अउ संस्कार।7 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps August 26, 2018 Read more